रास्ते की तरफ की दीवार आधी से ज्यादा फटने से दुर्घटना का अंदेशा

 सांभर में 200 वर्ष पुराने भैंरव मंदिर का नहीं है कोई धणी धोरी

शैलेश माथुर की रिपोर्ट 

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सांभरझील (जयपुर)। यहां राजपथ पर पुरानी कोतवाली के बाहर स्थित भैरव मंदिर की रास्ते की तरफ की दीवार का आधे से ज्यादा हिस्सा फट कर दो भागों में नजर आने लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मंदिर का कई दफा आसपास के लोगों की ओर से इसकी मरम्मत का काम करवाया भी गया था। कुछ भक्तों की ओर से अपने स्तर पर इसी टूट-फूट भी ठीक करवाई गई थी लेकिन   मंदिर में कोई पुजारी नहीं है केवल लोग ही यहां पर आकर भैरव जी को दीप प्रज्वलित कर  व सिंदूर चढ़ाकर पूजा अर्चना कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। 

देवयानी गंगा माता मंदिर के पुजारी पंडित हरिप्रसाद शर्मा,  भक्त सत्यनारायण स्वामी से बात करने पर बताया कि यह मंदिर स्टेट टाइम का ही बना हुआ है जो करीब तीन शताब्दी  पुराना है। मंदिर की दीवार फटने से मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी खतरा बना हुआ है। मंदिर का वर्तमान में कोई धणी धोरी नहीं होने से यह प्राचीन मंदिर अब धीरे-धीरे जर्जर अवस्था में पहुंचता जा रहा है। 

बताया गया कि सांभर में अधिकांश रास्तों पर भैरव मंदिर मौजूद है। राजा महाराजाओं के जमाने में इन्हें कोतवाल के रूप में माना जाता था जो नगर की सुरक्षा के लिहाज से स्थापित किए गए थे। लोगों का कहना है कि ऐसे प्राचीन मंदिरों को संरक्षित और संधारित किए जाने के लिए देवस्थान विभाग को प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि यहां के इतिहास को कायम रखा जा सके, अन्यथा ऐसी प्राचीन धरोहर एक दिन इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।