मोदी जी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो विदेश में ज्यादा भारत में कम रहते हैं। धरातल पर कम हवाई जहाज में ज्यादा उड़ते हैं। अपने नाटकीय अंदाज और भाषण देने की कला में माहिर है। मीठा बोलना और अपनी छवि का इस प्रकार प्रदर्शन करते है कि विदेश में सम्मान मिलता है लेकिन यह केवल मात्र भारत की वैश्विक स्तर पर पहचान बढ़ा रहा है मोदी जी की निजी पहचान बढ़ा रहा है। देश के अंदरूनी हालात की क्या स्थिति है, इस पर मोदी जी कभी नही बोलते है।करोड़ों के विकास और परियोजनाओं की बातें करते हैं। लंबे लंबे भाषण देते हैं। सत्ता में रहते हुए मोदी जी विदेश यात्राएं घूमना फिरना सब पूरी कर रहे है। देश का पहला प्रधानमंत्री है जो द्वारिका जाकर समुद्र के अंदर की द्वारिका नगरी को भी देखकर आ गया है। विकास के नाम पर अरबों करोड़ों रुपए की परियोजनाएं भ्रष्टाचार की भेट चढ़ चुकी है। अगर अरबों करोड़ के विशाल स्तर पर उद्योग धंधे लगाए जाते तो देश के युवाओं को रोजगार मिलता।
हमारी अर्थव्यवस्था और मजबूत होती। युवा पीढ़ी आगे होकर इन परियोजना को पूरा कर सकती थी। कभी भी रोटी, कपड़ा और मकान का जिक्र नहीं करते हैं। सत्ता में आने के लिए झूठ बोला गया देशवासियों से वादा किया गया की काला धन वापस आएगा और प्रत्येक के खाते में 15-15 लाख रुपए आएंगे। काला धन तो नहीं आया उद्योगपतियों को और छूट भी दे दी गई है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को कितना भी चंदा दे उसकी जांच पड़ताल नहीं की जाएगी। साफ जाहिर है कि वह काला धन है।
वोट पाने के लिए नि:शुल्क योजनाएं बनाई जाती है लेकिन वह पैसा कहां जा रहा है इसका पता नहीं चलता है। भारत जैसे गरीब देश के खर्चे राम मंदिर निर्माण के लिए 2500 करोड रुपए, कुंभ मेला 4200 करोड रुपए, पटेल की मूर्ति 3000 करोड रुपए, ट्रंप भारत का दौरा 125 करोड़ रुपए, मोदी जी की विदेश यात्राओं का खर्चा अभी तक का 700 करोड रुपए, अभी आगे की विदेश यात्राएं बाकी है। महंगाई के नाम पर सांसदों के वेतन भत्तों में 24% वृद्धि कर दी गई। जनता देखती रह गई। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।