आहार ही औषधि है

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भारतीय सिद्धांत "आहार ही औषधि है"यह ब्रह सत्य है। इसको विज्ञान भी नहीं  झुठला सकता है। हमारे देश में कहावत भी है "जैसा खाए अन्न, वैसा होवे मन"। आहार ही ओषधि है का तात्पर्य  है कि भोजन केवल पेट भरने मात्र का साधन नहीं है। स्वास्थ्य व कल्याण का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद में कहां गया है कि व्यक्ति की प्रकृति वात, पित्त ,और कफ की होती है और उसी के अनुसार आहार होना चाहिए। जलवायु के अनुसार खानपान की परंपरा है। शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वह बरसात में भी ऋतु के अनुसार भोजन करने का प्रचलन है। इसमें बासी और प्रसंस्कृत भोजन  निषेध है। यहां तक की भारत के अलग-अलग राज्यों में भी वहां की जलवायु के अनुसार ही खान-पान है। आहार ही औषधि पद्धति से लोग स्वस्थ और प्रसन्न रहते हैं। भारतीय जीवन शैली,संस्कृति, खान पान हमारे ऋषि मुनियों के बनाए हुए  सदियों पुराने नियम हैं। 

ऋषि मुनियों ने आयुर्वेदिक पद्धति बनाई उसमें देशी जड़ी बूटियों से निर्मित दवाइयां से इलाज संभव है। इनके नकारात्मक प्रभाव भी नहीं होते है। अंग्रेजी दवाइयां कुछ समय के लिए प्रभावी होती है। इससे दूसरी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है। जड़मूल से रोग को खत्म नहीं किया जा सकता है। आजीवन दवाइयां लेनी पड़ती है। कुछ समय से पाश्चात्य संस्कृति के खान पान ने हमारे आहार को विकृत कर दिया है पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन, पास्ता, चाइनीस फूड, पैकेट में बंद जंक फूड चिप्स कुरकुरे नूडल्स हमारे आहार में शामिल हो गए है। अभिभावक बच्चों को इसके हानिकारक प्रभाव से अवगत कराए ।जब तक शरीर की पाचन क्षमता इसको हजम कर सकती है कर लेगी। तत्पश्चात स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव होने लगता है।

 बच्चे बीमार हो जाते हैं। स्किन एलर्जी, सफेद दाग, पीठ पर छोटे-छोटे दाने उभरने लगते है। छोटी उम्र में शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक इसी का असर है। इस फूड में पौष्टिक कुछ भी नहीं है लेकिन प्रिजर्वेटिव जरूर होता है जो लंबे समय तक खाद्य सामग्री को कृत्रिम रूप से सुरक्षित रखता है। प्रिजर्वेटिव खाद्य सामग्री हमारे लिए अत्यंत घातक है।भारतीय भोजन में दाल, हरी सब्जियां, दही, रोटी, चटनी मौसमी फल आदि का प्रचलन है और यही हमारे स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है। भारतीय सिद्धांत "आहार ही औषधि है" पूरे विश्व में भी लागू किया जा सकता है। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)                        

लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।