भारत में भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है। सरकारी विभाग, निजी सेक्टर या व्यापार हो हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार है। चपरासी से लेकर नेता तक भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे है। पूरी श्रृंखला बनी हुई है। इसके अलावा अप्रत्यक्ष भ्रष्टाचार का उदाहरण भी है। सशक्त वीडियो सामने आया है कि गाजियाबाद में 7 सालों से किसी ने विदेशी दूतावास बना रखा है। आई.बी.,सी.आई.डी., एल.ई.ओ. किसी को भी भनक नहीं लगी होगी। बात भ्रष्टाचार पर आकर अटक जाती है। शेयरिंग किया गया होगा। 18 वर्ष की उम्र में ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जाता है 15 साल बाद वापस बनाया जाता है तो क्या 33 साल की उम्र में आदमी ड्राइविंग करना भूल जाता है। 18 साल की उम्र में वीजा पासपोर्ट बनवाते हैं 28 साल में वापस नया बनाना पड़ता है। सड़के बनती है पर नालियां नहीं बनाई जाती है इसलिए सड़कों पर पानी भरा रहता है और सड़के जल्दी टूटती है। वापस टेंडर भरे जाते हैं कमीशन दिया जाता है। ये सब अप्रत्यक्ष भ्रष्टाचार के नमूने हैं। वीडियो में बताया गया है कि अगर ₹100 से बड़ी करेंसी का नोट बंद कर दिए जाए। संपत्ति को आधार से लिंक कर दिया जाए। नारको पॉलीग्राफ बैन मेकिंग में भी कानून बना दिया जाए। भ्रष्टाचार को देशद्रोह, जघन्य अपराध घोषित किया जाए। भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जप्त कर ली जाए, नागरिकता समाप्त कर दे। 1 साल के अंदर कारावास और फांसी की सजा तय कर दे तो भारत से भ्रष्टाचार 100 प्रतिशत खत्म हो सकता है। क्या यह संभव है? आपका क्या मानना है। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।