समाज सुधार की ओर एक कदम
सलमानी समाज राजस्थान के जिम्मेदार रहबरों से अपील है कि अगर हम अपने समाज में सुन्नती निकाह को आम करना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें खुद इस पर अमल करके मिसाल कायम करनी होगी। जब तक हम अपने जीवन में इस सुन्नत को अपनाकर सामने नहीं लाते, तब तक समाज से निकाह में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकना मुश्किल है।
इस संबंध में सलमानी समाज राजस्थान के सदर हाजी अब्दुल सत्तार सलमानी ने कहा कि दीन केवल नमाज़ और ज़कात तक सीमित नहीं है। दीन इंसानी ज़िंदगी को जीने का एक बेहतरीन तरीका है, जिसे अपनाकर हम अपनी दुनिया को बेहतर बना सकते हैं। लेकिन आज आमतौर पर जिन लोगों को समाज का रहबर माना जाता है, उनकी अपनी ज़िंदगी दीन की बुनियादी बातों से खाली नज़र आती है। इसी वजह से समाज में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आज हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि निकाह जैसे पवित्र काम में भी बेवजह का खर्च बढ़ गया है। लाखों रुपये केवल दिखावे में खर्च कर दिए जाते हैं, जबकि यही रकम अगर बच्चों की तालीम और तरक्की में लगाई जाए तो हमारा समाज मजबूत बन सकता है।
सत्तार सलमानी ने आगे कहा कि समाज में रहबर कहलाने वाले लोग अगर सबसे पहले अपने घरों में सुन्नती निकाह को अपनाएं, साधारण और शरीयत के मुताबिक निकाह करें, तो समाज में अपने आप एक अच्छा संदेश जाएगा। इस तरह हम बुराइयों को रोक सकते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा दिखा सकते हैं।
अंत में हाजी अब्दुल सत्तार सलमानी ने कहा कि सुन्नती निकाह न सिर्फ दीन का हिस्सा है बल्कि फिजूलखर्ची रोकने और समाज के आर्थिक बोझ को हल्का करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। अब वक्त आ गया है कि हम अपने अमल से समाज में बदलाव लाएं और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सही कदम उठाएं। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)