देश की प्रशासनिक व्यवस्था

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पूरे भारत में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। थाना आम नागरिक की सुरक्षा के लिए बनाया गया है लेकिन प्रत्येक थाना भ्रष्टाचार में लिप्त है। लोग अपनी नैतिकता तक भूल चुके हैं। दुष्कर्मियों के आरोपियों को वकील मिल जाते हैं। मुंबई आतंकी हमले के तस्वुर राणा को वकील मिला है। उस हादसे को बरसों बीत गए अभी तक राणा की खातिरदारी हो रही है। बालासाहेब ठाकरे ने कहा था किसी भी आतंकवादी पर कोई मुकदमा नहीं किया जाएगा, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं की जाएगी सीधे गोली मार दी जाएगी। कई  आतंकी हमारी जेल में बंद है जिनके लिए स्पेशल सेल, सिक्योरिटी और खाने पीने का खर्चा सरकार उठा रही है। मंत्री व विधायकों के लाखों के बिजली के बिल बकाया है आमजन होता तो कनेक्शन काट दिया जाता। बिजली विभाग अपने परिचितों के मीटर इस प्रकार सेट करते हैं कि बिजली का बिल कम आता है और सरकार को चपत लगती है। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल और भी बदतर है। देश के कुछ ही अस्पतालों में सरकार की नि:शुल्क योजनाएं लागू होती है जबकि देश के सभी अस्पतालों में यह योजनाएं लागू किए जाने चाहिए ताकि बीमार व्यक्ति निकटतम अस्पताल  से अपना इलाज करवा सके। अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है पुलिस आती है और हफ्ता वसूली करके चली जाती है। पीडब्ल्यूडी विभाग में निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारों द्वारा तय कमीशन अधिकारियों के घर पर पहुंचा दिया जाता है। फील्ड पर जाकर देखने की तकलीफ नहीं उठाते है। इसलिए आए दिन सड़के पुल टूटते रहते है। लगभग सभी विभागों में यही स्थिति है। देश उद्योगपतियों के हाथ में बिक चुका है। यह कैसी दुखद त्रासदी है कि 12 जून को अहमदाबाद में होने वाले प्लेन क्रैश में  बोइंग विमान कंपनी अपनी रिपोर्ट में पायलट की गलती बता रही है कि प्लेन टेक ऑफ होने से पहले फ्यूल स्विच को ऑन नहीं किया गया था। इससे बड़ा अपमान हमारे देश के पायलट का क्या हो सकता है। अगर आज पायलट जिंदा होते अपने बचाव में कुछ कहते। इतने बड़े आरोप पर भी सरकार मौन है जैसा कि वह हमेशा करती आई है। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)                

लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।