कमलनाथ के बहाने कांग्रेस को शून्य करने की नई थ्योरी
भोपाल से नवीन जैन की रिपोर्ट 

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केंद्र में कभी पर्यावरण मंत्री रहकर दुनिया भर में नाम कमा चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ के बारे में जुमला मशहूर रहा है कि वे कभी भी कोई भी कमाल दिखा सकते हैं। दून स्कूल में स्व.राजीव, और स्व.संजय के सखा होने के कारण उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री, और राजीव, तथा  संजय की माताजी स्व. इंदिरा गांधी का ऐसा विश्वास जीता था, कि इंदिराजी उन्हें अपना तीसरा बेटा तक मानने लगी थीं। बाद में वे संजय ब्रिगेड के ज़रूरी कमांडर हो गए। कहा जाता था, कि इसी कारण  सोनिया गांधी को वे उसी दौर में फूटी आंख नहीं सुहाते थे, लेकिन आखिरकार कमलनाथ ने  फिर कमाल कर दिखाया। नतीजा यह हुआ कि सोनिया ने उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाकर 2018में भोपाल भेजा, और कमलनाथ ने एक बार पुन:अपने नाम की सार्थकता इस तरह  बताई कि सालों  से सकुशल चल रही मामा शिवराज सिंह की भाजपा को सरकार को 2018के ही विधानसभा चुनावों में छू मंतर करके इस तरह बताया। इन चुनावों में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला था, लेकिन तब कमलनाथ अच्छे से जानते थे कब कहां किसके लिए कितनी थैलियां खोलनी है। उन्होंने दूसरे विधायकों के साथ करीब 16 महीने लगभग लोकप्रिय सरकार चलाई, लेकिन भाजपा के वर्तमान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उनका अहम ऐसा टकराया कि उनकी सरकार भी गिर गई। मामा ने भाजपा की फिर सरकार बना ली, और तब ही सिंधिया को भाजपा ने  राज्यसभा की सदस्यता से नवाज़ दिया।

इसके बाद ही कमलनाथ का राजनीति में जो "अंधकार युग" प्रारंभ हुआ तो उसके अब तक खत्म होने के आसार अब दिख ही नहीं रहे थे। कमलनाथ को विश्वास था कि कांग्रेस आलाकमान उनकी वफादरियों को देखते हुए इस 78वर्ष की बेहद थकी उम्र में उन्हें पूरा सम्मान देते हुए उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा में भेजेगी।

लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ऐन मौके पर  फिर कमलनाथ को गोता खिला दिया, और अपने कट्टर वफादार ग्वालियर चंबल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक सिंह को राज्यसभा के लिए कांग्रेस से नामांकित करवा दिया। माना जा रहा है कमलनाथ की इस फैसले से जैसे नींद उड़ गई, क्योंकि अशोक सिंह 

की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे वे कांग्रेस के टिकट पर तीन बार लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। हां, उन पर हरदम  गांधी छाप की ऐसी कृपा बनी रही कि वे पक्ष विपक्ष दोनों को खुश करते रहे हैं। 

जब सुमित्रा महाजन लगातार आठ बार भाजपा की तरफ से इन्दौर से लोकसभा के लिए चुनी जाती रही और अंतिम कार्यकाल में जब लोकसभा की स्पीकर रहीं तभी से कहा जाता है कि कमलनाथ से उनके राजनीतिक रिश्ते अच्छे रहे।माना जा रहा है कि वक्त की नजाकत देखते हुए ताई ने कुछ दिन पहले ही बयान देकर कमलनाथ को भाजपा में शामिल हो जाने का खुला निमंत्रण दे दिया था। इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी.शर्मा ने भी एक तरह से ताई के निमंत्रण पर बकायदा मुहर लगा दी। वीडी शर्मा ने 16 फरवरी को भोपाल में एक प्रैस कांफ्रेंस में कहा कि यदि कमलनाथ भाजपा में शामिल होना चाहते हो तो उनके लिए भाजपा के दरवाजे खुले हुए है। वीडी शर्मा ने यह भी कहा कि पी एम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और समाज के लिए कमलनाथ कुछ करना चाहते हो तो उनका स्वागत है। उससे मिलती जुलती बात ही ताई ने भी कही थी। ताई ने कहा था कि कमलनाथ का विकास में विश्वास हो और वे भाजपा में आना चाहते हो तो प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद ले और भाजपा में आ जाए।

यदि वाकई कमलनाथ भाजपा में शामिल हो जाते है तो यह भी हो सकता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमर ही टूट जाए क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में जितने भी विधायक कांग्रेस के टिकट पर जीते है उनमें से अधिकांश कमलनाथ समर्थक बताए जाते है। इन विधायकों को कुछ दिनों पहले ही कमलनाथ अपने भोपाल स्थित निवास पर दावत के लिए बुला भी चुके है। यदि कमलनाथ वाकई भाजपा का भगुवा दुपट्टा गले में डाल लेते है तो उन्हें भी और भाजपा को भी कई सारे फायदे मिल सकते हैं। कमलनाथ का नाम दबी जबान से ईडी की संभावित जांच में लिया जाता रहा है। फिर 1984 में नई दिल्ली में जो हिंदू सिख दंगे हुए थे  उनकी भी फाइलों में कमलनाथ का नाम खुद गृहमंत्री अमित शाह इशारों ही इशारों में बताते रहे है। अपने पुत्र नुकुल नाथ को भी तय है कि वे भाजपा में अपने साथ ही ले जायेंगे। और चाहेंगे की भाजपा के टिकट पर लोकसभा से छिंदवाड़ा का टिकट दिलवा कर नूकुलनाथ का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित कर दे।चूंकि शिव राज सिंह चौहान की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर खास नजर है इसलिए यदि नूकुल नाथ को भाजपा छिंदवाड़ा से लड़वाती है तो शिवराज सिंह की चुनौती अपने आप गल जाएगी। 

ऐसे में भाजपा को सबसे बड़ा फायदा यह मिल सकता है कि मध्य प्रदेश में वह कांग्रेस को शून्य में जाने के लिए मजबूर कर दे क्योंकि यदि कमलनाथ भाजपा में शामिल हुए तो उनके समर्थक ,विधायक और अन्य कांग्रेस नेता भी कांग्रेस में तो बेरोजगार हो जायेंगे। इसी के साथ राज्यसभा से कांग्रेस के सांसद और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जो भाजपा के खिलाफ उटपटांग बयान देकर भाजपा के लिए आते दिन संकट खड़े करते रहने को हरदम कटिबद्ध रहते है उनकी तोड़ भी कमलनाथ के रूप में भाजपा को मिल जाएगी साथ ही दिग्विजय सिंह से कमलनाथ अपना पुराना राजनैतिक हिसाब किताब चुकता करने में सफल भी हो सकते है। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)