जी-20 शेरपा बैठक में आए परदेशी पावणों पर चला राजस्थानी लोक संगीत का जादू

उदयपुर में जी-20 समिट की प्रथम शेरपा मीटिंग में आए मेहमानों के लिए

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उदयपुर। उदयपुर में चल रहे चार दिवसीय जी-20 समिट के तीसरे दिन सिटी पैलेस के माणक चौक पर सम्पर्ण भारत के प्रमुख शास्त्रीय एवं लोक नृत्य की रंगारंग झलक परदेशी पावणों को प्रस्तुत की गई। ‘सर्वेशं भारतः‘ शीर्षक पर आधारित इस प्रस्तुति के आरम्भ में प्रोजेक्शन मैंपिंग के माध्यम से भारत के विभिन्न पर्यटक स्थलों को रंग बिरंगी लेजर लाईट्स एवं मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत किया गया। भारत के शेरपा, अमिताभ कांत ने पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की और राजस्थान सरकार का धन्यवाद् ज्ञापित किया। उल्लेखनीय है कि शेरपा बैठक के मेहमानों को राजस्थान की समृद्ध संस्कृति से रूबरू कराने के उद्देश्य से  4 से 7 दिसम्बर की पर्यटन विभाग द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर राजस्थान सरकार की मुख्य सचिव, श्रीमती उषा शर्मा और प्रमुख शासन सचिव, पर्यटन विभाग, श्रीमती गायत्री राठौड भी उपस्थित रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की अगली मनोरम प्रस्तुति सम्पूर्ण भारत के विभिन्न हिस्सों के शास्त्रीय एवं लोक नृत्यों और संगीत पर आधारित थी। परदेशी पावणों पर राजस्थानी पारम्परिक लोक नृत्य, भारतीय शास्त्रीय एवं लोक नृत्य का जादू चलाते हुए चरी, गैर एवं घूमर के अतिरिक्त तमिलनाडु का भरतनाट्यम, ओडिशा से ओडिसी, गोटीपुआ एवं मयूरभंज छाऊ नृत्य, केरल के मोहिनीअट्टम नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद कलाकारों द्वारा प्रस्तुत उत्तर प्रदेश के कत्थक नृत्य, मणिपुर का मणिपुरी, आंध्र प्रदेश का कुचिपुड़ी, केरल का कथकली, मणिपुर से पुंग चोलोम, गुजरात के गरबा, पंजाब के भांगड़ा नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। इसी क्रम में अगली प्रस्तुति असम के बगरुम्बा, गुजरात के डांगी, त्रिपुरा के होजागिरी, मध्य प्रदेश के बधाई और कश्मीर के  कश्मीरी नृत्य ने सभी को भारत के समृद्ध सांस्कृतिक ताने बाने से सराबोर कर दिया। 

कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति के माध्यम से राजस्थान के फैशन की भव्यता को पेश किया गया। राजस्थानी टैक्सटाईल की कालातीत निरंतरता - अतीत, वर्तमान और भविष्य को दर्शाती यह प्रस्तुति राज्य के लुभावने पारंपरिक एवं समसामयिक पहनावे को बेहद रोचक तरीके से पेश किया गया। 

रविवार और सोमवार को लोक कलाकारों ने बिखेरी राजस्थान के पारंपरिक संगीत की खुशबू

पर्यटन विभाग की ओर से रविवार शाम को होटल लीला के शीशमहल में मेहमानों को राजस्थान की धरा का अनुभव कराने के लिए डेजर्ट सिम्फनी की खास प्रस्तुति विश्व प्रसिद्ध लोक कलाकारों की ओर से दी गई। जिसमें लोक कलाकारों के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों का मेहमानों ने खूब आनंद लिया। इसमें राज्य के विभिन्न संभाग से आए लोक कलाकारों ने वाद्ययंत्रों की बेहतरीन प्रस्तुति दी।  पश्चिमी राजस्थान के लंगा मांगणियार समूह की सिंधी सारंगी पर अनूठे संगीत प्रस्तुती ने सभी का मन मोह लिया।  गाज़ी खान के नेतृत्व में दुर्लभ वाद्य संगीत नाद और राजस्थान के प्रसिद्ध स्वागत गीत केसरिया बालम ने शाम को खुशनुमा बना दिया। इसके साथ अन्य कलाकारों ने अलगोजा डबल बांसुरीॉ कॉर्डाेफोनिक वाद्दयंत्रॉ सुरिंडा हारमोनियमॉ खड़तालॉ ढोलक तंदूराॉ मोरचंग और मटका पर शानदार लोक धुनों की प्रस्तुति दी गई।

सोमवार को लेक पिछोला में स्थित जगमंदिर पैलेस पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘कलर्स ऑफ राजस्थान‘ में प्रदेश के विभिन्न लोक कलाकारों ने विदेशी मेहमानों का मन मोह लिया। राजस्थान की वीर गाथा, शाही परम्परा, मधुर लोकगीत को पिरोते इुए कलाकारों ने मेहमानों को प्रदेश की परम्परा के भव्य दर्शन करा दिए। 

पारंपरिक वेशभूषा में रॉयल स्वागत

शेरपा मीटिंग में आने वाले मेहमानों के लिए राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर मेहमानों को राजस्थान की संस्कृति से रूबरू कराने के लिए उनका स्वागत मारवाड़ की पारम्परिक वेशभूषा में बीकानेर के रौबिले एवं महिला लोक कलाकारों ने किया। इस दौरान राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों से संबंधित ब्रांडिंग भी की गई।