पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे अहम जरूरत : राकेश जैन



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बल्लभगढ़। गत दिवस बल्लभगढ़ के आदर्श नगर स्थित मलेरणा रोड के बालाजी कालेज आफ फार्मेसी के डा. एस. एन. सुब्बाराव सभागार में प्रख्यात पर्यावरणविद और सिल्यारा के संत सुंदर लाल बहुगुणा की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी में पर्यावरण के क्षेत्र में बरसों से कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ताओं और वृक्षों की रक्षा को समर्पित कार्यकर्ताओं को ग्रीन इंडिया फाउण्डेशन ट्रस्ट द्वारा पर्यावरण भूषण सम्मान, पर्यावरण रत्न सम्मान और वृक्ष मित्र सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुख्य अतिथि पर्यावरण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक राकेश जैन, विशिष्ठ अतिथि हरियाणा प्रांत के सह संयोजक  श्रीभगवान, विशिष्ठ अतिथि हरित यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल,  संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे भारत सेवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्रीकृष्ण सिंहल और विशिष्ठ अतिथि हिसार के स्वामी सहजानंद ने प्रदान किये। संगोष्ठी के प्रारंभ में बीज भाषण जाने-माने पक्षी प्रेमी, गौरय्या संरक्षण के लिए विख्यात पर्यावरणविद व हमारी धरती नामक पर्यावरण पत्रिका के संपादक सुबोध नंदन शर्मा ने दिया। अपने सम्बोधन में शर्मा ने जैव विविधता की महत्ता को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण हेतु समाज में जागरूकता पर बल दिया।

संगोष्ठी में अपने भाषण में मुख्य अतिथि राकेश जैन ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे अहम जरूरत है। समूची दुनिया में दिनों दिन पर्यावरण के क्षय ने मानव जीवन के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। जैव विविधता का दिनोंदिन तेजी से हो रहा ह्वास, बढ़ता तापमान, प्रदूषण की भयावहता, मौसम के चक्र में बदलाव, सब कुछ पर्यावरण क्षरण का ही दुष्परिणाम है। इसमें मानव की जीवनशैली में हुए बदलाव की निरंतरता की अहम भूमिका है। जबकि देश के कुछ राज्यों द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयास प्रशंसनीय हैं लेकिन उसके बावजूद इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना बाकी है जिसके लिए निरंतर प्रयास किया जाना समय की मांग है। यह सब जीवनशैली में बदलाव के बिना असंभव है। इसके लिए जागरूकता की महती आवश्यकता है। इस दिशा में हमें तेजी से प्रयास करने होंगे तभी कुछ बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।

संगोष्ठी में प्रख्यात पत्रकार एवं जल विषयक मामलों के विशेषज्ञ अरुण तिवारी, बिजनौर के उप जिलाधिकारी एवं जाने-माने पर्यावरण प्रेमी मांगे राम चौहान,  डा. जितेन्द्र नागर, प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, डा. बी. आर. अम्बेडकर कालेज, दिल्ली विश्व विद्यालय व अध्यक्ष, इन्वायरमेंट सोशल डवलपमेंट ऐसोसियेशन को सुंदर लाल बहुगुणा स्मृति पर्यावरण भूषण सम्मान, नव प्रभात जन सेवा संस्थान दिल्ली के श्रीमती सुमन द्विवेदी व राजकुमार दुबे, श्रीमती प्रवीन इब्बन, लोकमानव कल्याण ट्रस्ट के प्रोफेसर अजीत डबास व वृन्दावन के देवेन्द्र कौशिक को सुंदर लाल बहुगुणा स्मृति पर्यावरण रत्न सम्मान, नदी रत्न अशोक उपाध्याय, वीरेन्द्र गोदियाल, सतेन्द्र सिंह भण्डारी, रमेश चंद्र बौडाई, प्रशांत सिन्हा, श्रीमती जयश्री सिन्हा, 100 करोड़ ट्री अभियान के आशीष शर्मा व अवधेश तिवारी आदि 10  पर्यावरण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाली विभूतियों को सुंदर लाल बहुगुणा स्मृति वृक्ष मित्र सम्मान से सम्मानित किया गया।

संगोष्ठी के प्रारंभ में आयोजक बालाजी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक,शिक्षाविद व विश्व जल परिषद के सदस्य डा. जगदीश चौधरी ने बहुगुणा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि बहुगुणा जी पर्यावरण जगत के प्रकाश स्तंभ थे। आज आवश्यकता इस बात की है कि जीवन के जिन मूल्यों-आदर्शों और वृक्षों की रक्षा की दिशा में जो उनका अभूतपूर्व योगदान है, जो हमारे लिए अमूल्य थाती है, हम संकल्प लें कि उसे संजोकर रखेंगे और उनके सपनों को पूरा करने में कोई कोर कसर न रखेंगे, उनकी पुण्य तिथि के अवसर पर यही सबसे बडी़ हमारी श्रृद्धांजलि होगी।

अपने संबोधन में अरुण तिवारी ने कहा कि इसमें दो राय नहीं कि पर्यावरण का भयावह संकट हमारे सामने मुंह बाये खडा़ है। उसके बावजूद हम उसकी गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। न सरकारें और न हम ही। दुखदायी बात तो यह है कि पर्यावरण संकट के दुष्प्रभावों से मानव जीवन, जीव-जंतु, जैव-विविधता, नदी, जल, वायु और धरती कोई भी अछूता नहीं बचा है। अधिक उत्पादन की चाहत और रासायनिक खादों के अत्याधिक उपयोग का परिणाम धरती की उर्वरा शक्ति के खात्मे और धरती बंजर होते जाने के रूप में सामने आया है। इससे पशु-पक्षी, कीट-पतंगे, जीव-जंतु, हमारा भोजन और स्वास्थ्य और तो और  प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हुई है। इसके बाद भी हम नहीं चेत रहे हैं। समय की मांग है कि अब तो चेतो और पर्यावरण का जो नुकसान हम कर चुके हैं, उसमें कमी लाने की दिशा में ठोस कदम उठायें। तभी धरती और मानव सभ्यता की रक्षा की उम्मीद की जा सकती है। 

संगोष्ठी में जहां उप जिलाधिकारी, बिजनौर मांगे राम चौहान ने दिनोंदिन हो रहे जैव विविधता के क्षरण पर दुख जताया और वृक्ष संरक्षण पर जोर दिया, वहीं पर्यावरण वैज्ञानिक डा. जितेन्द्र नागर ने पर्यावरण क्षरण के वैज्ञानिक दुष्प्रभावों का सिलसिलेवार तथ्य परक खुलासा किया कि अब स्थिति यह है कि सांस लेना तक दूभर है। ऐसी स्थिति में जीवन कैसे सुरक्षित रह पायेगा, यही सबसे बडी़ चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अब बहुत हो चुका, अब कुछ करना ही होगा तभी धरती और जीवन बचा रह पायेगा।

यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल ने ऋषियों-मुनियों,पौराणिक ग्रंथों, पुराणों व रामायण का उल्लेख करते हुए जीवन में वनों की महत्ता की व्याख्या की और वृक्ष लगाने पर जोर देते हुए कहा कि यह सच है कि यदि पेड़ रहेंगे तो हम रहेंगे, नदियां रहेंगी, जीवन रहेगा। इसलिए पेड़ लगाओ। स्वामी सहजानंद ने जहां ऋषि परंपरा में वनों की भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं हरियाणा प्रांत के पर्यावरण गतिविधि के सह संयोजक श्रीभगवान ने पर्यावरण के ह्वास को मानव जीवन के ह्वास की संज्ञा देते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया, वहीं भारत सेवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्रीकृष्ण सिंहल जी ने कहा कि पर्यावरण का संकट हम सबके सामने बहुत बडी़ चुनौती के रूप में है। जबकि यह हमारे जीवन का आधार है। इससे निपटना इसलिए भी बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि मानव जीवन ही नहीं, धरती भी इसके दुष्प्रभाव का शिकार है। ऐसी स्थिति में धरती पर रहने वाले जीव-जंतु, प्राणी, कीट-पतंगे कैसे अछूते रह सकते हैं।  इसलिए पर्यावरण संरक्षण हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यही हमारा सबसे बडा़ धर्म है। अंत में वरिष्ठ पत्रकार,पर्यावरणविद व राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र रावत ने सभी अतिथियों, सम्मानित पर्यावरण जगत के योद्धाओं, उपस्थित समाज सेवियों, बुद्धिजीवियों व आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और आश्वस्त किया कि आने-वाले समय में भी पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत योद्धाओं का गिफ्ट समय समय पर सम्मान करता रहेगा और पर्यावरण रक्षा की दिशा में हर संभव प्रयासरत रहेगा।