स्मार्ट सिटी के मायने : डा. सत्यनारायण सिंह

विश्व पुरातत्व दिवस 18 अप्रेल

लेखक : डा. सत्यनारायण सिंह

(लेखक रिटायर्ड आई.ए.एस. अधिकारी हैं) 

www.daylife.page 

जयपुर के कर्णधार कुछ तोड़ने और पुनः बनाने पर अनावश्यक पैसा खर्च करने और अनावश्यक प्रचार करने को हो ही स्मार्ट सिटी का मतलब बता रहे है जबकि स्मार्ट सिटी का अर्थ है सुविधायुक्त, गुणवत्तापूर्ण नगरीय जीवन।

जयपुर नगर की दुर्दशा हो रही है, सड़कों की हालत खराब है, लोग पेयजल के लिए तरस रहे है, यातायात का दबाब बढ़ गया है, पार्किंग के लिए जगह नहीं है, सर्वत्र गंदगी फैल रही है, प्रदूषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, बीमारियां बढ़ रही है, हादसे व अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है।

जयपुर की जनसंख्या लगभग 37 लाख हो गयी है। लोगों से गंदगी की शिकयतें मिलने पर भी सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं हो रही है, गली मोहल्ले में कचरा फैल रहा है, सड़कों का निर्माण और रख-रखाव तय मानकों के बीच नहीं है। कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां 10-10 किलोमीटर तक सरकारी अस्पताल नहीं है, विशेषज्ञ डाक्टर नहीं है। कुल 8 हजार सफाईकर्मी है उन पर प्रबन्धन की कमी है। कचरा संग्रहण के संबंध में प्रापर मानिटरिंग नहीं है। सड़क निर्माण में घटिया तरीका व सामग्री के इस्तेमाल से सड़क कुछ ही दिनों में टूट जाती है। 

खेलों के लिए समुचित सुविधायें नहीं है, जयपुर का पारम्परिक सौन्दर्य समाप्त हो रहा है, सरकारी सिस्टम पब्लिक फ्रैन्डली नहीं है, सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए स्मार्ट कार्ड लागू नहीं किया गया, बसें खटारा है, अनियमित हैं, संख्या कम है, मैट्रो का संचालन शहर के केवल एक हिस्से में हो सका, आटोरिक्शा चालकों की मनमानी होती हैं, मैट्रो व बसों के रूट का दायरा बढ़ाया जाय। पाईप लाईनों की जांच हो जिससे दूषित पानी की सप्लाई नहीं हो, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शीघ्र उचित कार्यवाही हो।

राजस्थान हाईकोर्ट के मान्य न्यायाधिपतियों ने कहा है ‘‘पड़ौसियों की मेहरबानी से अतिक्रमणों का पता चलता है।’’ अतिक्रमणों से सड़को ंकी चौड़ाई कम हो गइ्र है, जाम लग रहे है, आवारा पशुओं की वजह से लोग परेशान है, जलस्रोतों के रास्तों में अतिक्रमण हो रहे हैं, मास्टर प्लान कोतिलांजली दे दी गई है। जयपुर अब अपना गौरव खोता जा रहा है। ‘‘पिंक सिटी’’ अब ‘‘स्टिंग सिटी’’ बन गया है। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)