वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेन्द्र रावत गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय स्मृति सम्मान से सम्मानित


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एटा, उत्तर प्रदेश। वरिष्ठ पत्रकार,राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं प्रख्यात पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत को सैनिक पड़ाव स्थित जिला कृषि एवं औद्यौगिक प्रदर्शनी के अवसर पर एटा महोत्सव के मण्डप में आयोजित अखिल भारतीय पत्रकार सम्मेलन में प्रख्यात क्रांतिकारी योद्धा एवं पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री रघुराज सिंह द्वारा प्रदान किया गया। सभी पत्रकारों को मंत्री महोदय द्वारा सम्मान के अलावा प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह व शाल ओढा़कर सम्मानित किया। इस अवसर पर रावत के अलावा  वरिष्ठ पत्रकार, समकालीन चौथी दुनिया,दिल्ली के प्रधान संपादक प्रवीण चौहान को अमीर खुसरो स्मृति राष्ट्रीय सम्मान, प्रख्यात पत्रकार एवं साधना न्यूज चैनल के पूर्व सी ई ओ राघवेश अस्थाना को माधवराव  सप्रे स्मृति राष्ट्रीय सम्मान, जाने-माने खेल पत्रकार एवं अंतर्राष्ट्रीय ग्रांड मास्टर अमेरिका से आये अभय सिंह राठौर को व एबीपी न्यूज के ब्यूरो प्रमुख नितिन उपाध्याय को बलवीर सिंह रंग स्मृति राष्ट्रीय सम्मान और वरिष्ठ पत्रकार, समाचार विश्लेषक एवं सुप्रीम कोर्ट के ख्यातनामा वकील डा. अजय कुमार पाण्डेय को गोस्वामी तुलसीदास स्मृति राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। 

इस अवसर पर जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल आई ए एस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह आई पी एस, पी ए सी कमाण्डेंट आदित्य वर्मा आई पी एस, अलीगढ़ से आये एम एल सी मानवेंद्र सिंह गुरूजी, विधायक मारहरा वीरेन्द्र लोधी, पूर्व विधायक ममतेश शाक्य, ए आर एम कासगंज संजीव यादव, एटा प्रेस क्लब अध्यक्ष देवेश पाल सिंह,संयुक्त प्रेस क्लब अध्यक्ष एवं पीटीआई संवाददाता सुनील मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार नेत्रपाल सिंह चौहान, यू पी वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव राहुल गुप्ता एडवोकेट, वरिष्ठ पत्रकार,शिक्षाविद एवं भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रमुख विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार निशाकांत शर्मा, वैभव पचौरी, अमोलचंद श्रीवास्तव, राकेश कश्यप, राजीव वर्मा, संजीव गुप्ता, देवेन्द्र शर्मा देबू, के बी सिंह, बिशनपाल सिंह, अखंड प्रताप सिंह, रोहित भदौरिया, अजेन्द्र शर्मा, मोहसिन मलिक, गिरिराज चौहान, उमाकांत तिवारी, आर बी दुबे, पीयूष गोयल आदि एटा जनपद के समीपस्थ जिलों के सैकड़ों पत्रकारों,शिक्षाविदों व समाज सेवी संस्थाओं के प्रमुखों की मौजूदगी विशेष तौर पर उल्लेखनीय थी।

सम्मेलन का संचालन सम्मेलन संयोजक वरिष्ठ पत्रकार एवं एवीपी न्यूज के एटा/कासगंज परिक्षेत्र के प्रमुख राकेश भदौरिया ने किया और सम्मेलन की  सफलता हेतु सभी उपस्थित गणमान्य प्रमुख जनों, शिक्षाविदों,पत्रकारों सहित जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह, पीएसी कमांडेंट आदित्य वर्मा , एडीएम आलोक कुमार व एडीएम, प्रदर्शनी प्रभारी आयुष चौधरी का धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि आपने अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर पूरे सम्मेलन में उपस्थित रहकर हम सभी का उत्साह वर्धन किया, इस हेतु मैं और सम्मेलन आयोजन समिति उनके सदैव कृतज्ञ रहेंगे।

सम्मलेन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के मन्त्री श्रम एवं सेवायोजन रघुराज सिंह,जिला अधिकारी एटा अंकित कुमार अग्रवाल,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा उदय शंकर सिंह एवं कमांडेंट पीएसी आदित्य प्रकाश ने  किया। सम्मलेन का विषय प्रवर्तन करते हुए राहुल गुप्त एडवोकेट ने कहा कि सृष्टि के जन्म से ही आदि पत्रकार ऋषि नारद के द्वारा ये परम्परा शुरू हुयी है। वर्तमान पत्रकारिता उसी की वाहक है। पत्रकारिता में चुनौतियां आदि काल और स्वाधीनता संग्राम के समय में भी थीं। वर्तमान में सोशल मीडिया के सैलाब के इस दौर में भी वह मुंह बाये खडी़ हैं। इसके उपरांत समकालीन चौथी दुनिया नामक मासिक पत्रिका के प्रधान संपादक प्रवीन चौहान ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता का जैसे जैसे दायरा बढा है, वैसे-वैसे ही पत्रकारिता की  चुनौतियाँ भी बढ़ीं हैं। सच्चाई यह है कि सभी क्षेत्रों की अपनी-अपनी चुनौतियां हैं। 

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अजय कुमार पांडेय ने कहा कि  पत्रकारिता मानसिक दबाव की  दृष्टि से विश्व के पहले कठिनतम पांच व्यवसायों में से एक है। इतना चुनौतीपूर्ण व्यवसाय होने के वावजूद भी पारिश्रमिक की दृष्टि और सेवा लाभ के नजरिये से यह बहुत ही कमजोर है। जरूरत इस बात की है कि हमें अपनी पेशेगत चुनौतियों से ठीक से निबटना आना चाहिए और साथ में ये भी ध्यान रखना चाहिए कि  हमारी और हमारे व्यवसाय की  साख न गिरने पाये। वरिष्ठ पत्रकार और सम्मलेन  संयोजक राकेश भदौरिया ने कहा कि वर्तमान पत्रकारिता के सामने चाहे कितनी भी बड़ी चुनौतियां खड़ी क्यों न हों लेकिन पत्रकारों को उनके मार्गदर्शन से डिगा नहीं सकतीं। यह सच है कि भारत में मीडिया पर लगातार हमले हो रहे हैं। उनको शासन एवं सत्ता की  कठपुतली बनाया जा रहा है। यह किसी भी देश के लिये बहुत ही ख़तरनाक ट्रेंड है। 

अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकार अभय सिंह राठौर ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें विश्व के साथ चलने के लिये अपने देश की व्यवस्थाएं, तंत्र एवं सोच को विश्व स्तरीय बनाना पड़ेगा। शिक्षक एमएलसी मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पत्रकार उस चीज को खोज कर लाते हैं जो तथ्य सामान्य दृष्टि से हमें दिखाई नहीं पड़ता। इसलिए पत्रकारिता समाज हित में बहुत ही आवश्यक  एवं उपयोगी भूमिका निभाती है। 

मारहरा विधायक वीरेंद्र लोधी ने कहा कि जैसे साहित्य समाज का दर्पण होता है, ठीक वैसे ही पत्रकारिता राजनेताओं को  आइना दिखाकर सचेत करने का काम करती है। पूर्व विधायक पटियाली ममतेश शाक्य ने कहा कि पत्रकार देश व समाज की जो सेवा करते हैं,उसकी तुलना में उनके पारिश्रमिक और उन्हें मिलने वाली सुख सुविधाएँ बहुत ही कम हैं।  

इस अवसर पर एटा के जिला अधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने कहा कि  पत्रकारिता जगत में नये पत्रकार अपने यूट्यूब चैनल से सूचना तंत्र विकसित करके व्यावसायिक रूप से एक अच्छी आय खड़ी कर सकते हैं। सूचना क्रांति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा हम मीडिया को और अधिक उपयोगी व सशक्त बना सकते हैं। 

विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा उदय शंकर सिंह ने अपने उदबोधन में कहा कि पत्रकारों का जो सूचना तंत्र है उसका सकारात्मक उपयोग देश और समाज को चलाने के लिये होता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को अपने दायित्व निर्वहन के दौरान अपने व्यवसाय के मानकों को भी ध्यान में रखना होगा। वरिष्ठ पत्रकार शिक्षाविद विजय मिश्रा ने कहा कि  हमें अपनी खबर की  सत्यता को बनाये रखना चाहिए जिससे व्यवसाय की साख कभी ख़राब नहीं होती। 

अपने उद्बोधन में दिल्ली से आये वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं प्रख्यात पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता का क्षेत्र बहुत व्यापक होता जा रहा है। इसे किसी परिभाषा में बांधना बहुत ही मुश्किल है गया है। यदि हम बिखेमस्टीड की बात करें तो पत्रकारिता कला,वृत्ति और जनसेवा का माध्यम है। गांधी जी ने भी इसे सेवा ही माना। मानव सेवा इसका एकमात्र उद्देश्य है जो अन्याय, दमन के प्रतिशोध के साथ रचनात्मक प्रवृत्तियों के प्रोत्साहन में अहम भूमिका निबाहती है। इसका गौरवशाली इतिहास हमारी धरोहर है। इसमें बार गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, विष्णु फाड़कर, माधव राव सप्रे, माखनलाल चतुर्वेदी, राजेन्द्र माथुर, अज्ञेय की भूमिका महत्वपूर्ण है लेकिन आज हालात उसके बिलकुल उलट हैं। पत्रकार चूंकि समाज का ऐसा व्यक्ति होता है जिसके लिखे पर हजारों लोग भरोसा करते हैं। अतः उसे कुछ भी लिखते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि कहीं निजी हित संवर्धन के लिए चलाया जा रही आपकी कलम सामाजिक विश्वास की हत्या तो नहीं कर रही। सामाजिक सरोकारों से मुंह मोड़ना वाला नैतिक दृष्टि से पत्रकार कहलाने का अधिकारी नहीं है। इसलिये आपसी मतभेद भुलाकर पत्रकारिता के मूल्यों के रक्षक बन उसके वाहक बनो, शासक और जनता के बीच सेतु बनो,जनता की आवाज बनो, यही आपसे आशा-आकांक्षा है।