कमाल का शब्द है "शुक्रिया"

"शुक्रिया" कहने की आदत आपको स्वस्थ एवं प्रफुल्लित रखती है  

लेखिका : रेणु जैन 

इंदौर (मध्य प्रदेश) 

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शुक्रिया,धन्यवाद या थैंक्यू ये शब्द है तो छोटे से पर बड़े कमाल के है। जिससे कह दो वह खिल खिल जाता हैं और उसको भूलता नही। ये शब्द आपके पूरे व्यक्तित्व का आईना होते हैं। इसी आईने में से सामने वाले को नजर आता है कि आप अंदर से कितने विराट, बड़े,ओर गहरे हो। आप चाहें जितने ऊँचे पद पर हो या आपने चाहे जितनी समृद्धि अर्जित कर ली हो महज शुक्रिया, धन्यवाद या थैंक्यू कहने भर से सामने वाला अपने आप को आपके समान समझने लगता है। इससे एक अनोखी समरसता पैदा होती है । जो रिश्तो को लगातार गाढ़ा बनाती है। स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉक्टर विलियम फ्रेंक कहते है कि जब हम रोजाना,"शुक्रिया" जैसे शब्द अपनी दिनचर्या में शामिल करते है तो अन्य लोगों की अपेक्षा हम ज्यादा स्वस्थ रहते है। 

इससे हममें उत्साह, आशावाद और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। ऐसे लोगों में रोगों से लड़ने की ताकत औरों की अपेक्षा ज्यादा होती है। हम निर्णय भी जल्दी ले पाते है। हाँ या ना के चक्कर में तनाव नहीं झेलते। हमें प्रकृति तथा पूरी दुनिया के प्रति भी आभार का रवैया रखना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि आप जिनके प्रति शुक्रिया कर रहे है वे किसी भी उम्र के हो सकते है। ऐसे में संकोच न करे। खुले दिमाग से आभार व्यक्त करें। बच्चों को थैंक्स कह देने भर से वे ओर उत्साहित हो जाते है।

 भगवान ने हमें धरती पर अच्छे काम करने के लिए भेजा है। शुक्रिया अदा करना भी उनमें से एक है।  आभार व्यक्त करके आप किसी को खुश ही नहीं करते, बल्कि किसी पीड़ा को भी कुछ देर के लिए कम कर सकते है। शुक्रिया कहने में कुछ नहीं लगता, सिर्फ मन की प्रेरणा और होंठों की हरकत लगती है। ऐसा लग सकता है कि यह एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है लेकिन ऐसा है नही। जब तक मन में उल्लास, खुशी और दूसरों का दु:ख दूर करने की इच्छा नहीं होती तब तक हम धन्यवाद नहीं कर पाएंगे। 

अमेरिकी शिक्षाविद ओर मनोचिकित्सकों ने नेचर पर जो शौध किये है वे बड़े ही चौकाने वाले है। उनका मानना है कि शुक्रिया बोलने वाला व्यक्ति जल्दी ही अपनी पहचान बना लेते है। उनका नजरिया उन्हें हर क्षेत्र में सफल, सुखी तथा समृद्ध बनाता है। यह बात घर से शुरू होती है और फिर आपके आफिस या आसपास चाहें वह चौराहा ही क्यों न हो आपकी यह अदा आपको हर जगह लोकप्रिय बनाती है। लोग आपके इस अनोखे अंदाज से प्रभावित होने के कारण आपको विशेष सम्मान के हकदार बनाते है। शुक्रिया आपके शरीर को भी स्वस्थ बनाती है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर माइकल मेंथॉलआग ने अपनी साइकोथेरेपी मैं इस बात का जिक्र किया है कि रोजाना धन्यवाद शब्द का इस्तेमाल एक साधारण सा काम है जो धीरे-धीरे जिंदगी को बेहतर बनाता है। आपकी सोच का स्तर बढ़ता है। प्यार तथा अपनापन जीवन मे आता है। इसे आदत बनाने से कोई नुकसान नही होता बल्कि यह आदत आपको मानसिक संतुष्टि देती है जो शारीरिक तथा मानसिक सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। 

जब आप दिल से किसी का आभार मानते हो तो खुशी का स्तर बढ़ जाता है। कृतज्ञता यही काम करती है। यह हमें छोटे छोटे पलों में खुश रहना सिखाती है। जब आप विनम्रता पूर्वक किसी को शुक्रिया कहते है तो सामने वाले पर इसका प्रभाव पड़ता है तथा संबंधों में घनिष्ठता आती है। इससे आपके मित्रों का दायरा बढ़ता है। दोस्ती ज्यादा मजबूत होती है। आपकी यह आदत आपको महसूस ही नही होने देती की आप मुसीबत में है। ऐसे रिश्ते निबाहना कोई कठिन काम नही है। आपका धैर्य तथा समझदारी ऐसी ही दोस्ती की नींव है। (लेखिका का अपना गहन अध्ययन एवं उनके अपने विचार हैं)