'शेरगिल-द पीलीभीत सागा' के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर देखिए

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मुंबई। "तू शेर है तो मैं भी शेरदिल हूं!" एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म ‘शेरदिल-द पीलीभीत सागा’ झुंडाव गांव के एक निडर और साहसी सरपंच की कहानी है, जो अपने लोगों को बचाने के लिए एक बड़ी विचित्र योजना बनाता है। इस फिल्म का वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर एंड पिक्चर्स पर होने जा रहा है, जिसमें पंकज त्रिपाठी के साथ-साथ कुछ और बढ़िया कलाकार हैं। इसमें एक हार्ड-हिटिंग थीम के साथ एक ऐसे इंसान के पक्के इरादों की कहानी दिखाई गई है, जो बदलाव लाना चाहता है। देखिए साहस की यह कहानी 'शेरदिल - द पीलीभीत सागा', 10 दिसंबर को रात 10 बजे, सिर्फ एंड पिक्चर्स पर।

इस फिल्म में गंगाराम की कहानी है, जो अपने लोगों को शेर के आतंक से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देता है। जिंदगी और मौत के इस ड्रामा में कई हास्यप्रद पल हैं, साथ ही उन लाचार ग्रामीणों की व्यथा है, जो खुद को बचाने के लिए गंभीर कदम उठाने पर मजबूर हैं। इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने एक भोले-भाले सरपंच और अपने गांव वालों के एक मजबूत रक्षक गंगाराम की भूमिका निभाई है। गंगाराम की बोली और उनका अंदाज़ बड़ा निराला है। वो बहुत हिम्मतवाले हैं, लेकिन बड़े मासूम हैं। उनके साथ सायनी गुप्ता और नीरज कबी भी कुछ खास पलों में नजर आते हैं।

इस फिल्म में यह एक्टर एक संवाद बोलते नजर आते हैं, "बाग को मारने नहीं गए थे जंगल में, हम तो बाग से खुद का शिकार करवाने गए थे!" इसी बात से अपने लोगों के प्रति गंगाराम का प्यार और उनकी मासूमियत साबित हो जाती है। इस फिल्म में नीरज कबी और सायनी गुप्ता भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। राष्ट्रीय अवॉर्ड विजेता श्रीजीत मुखर्जी के द्वारा लिखी और निर्देशित की गई फिल्म ‘शेरदिल’ में कई दिलचस्प रंग हैं और रोजमर्रा की हास्यप्रद घटनाओं में रचे-बसे कुछ अनोखे दार्शनिक विचार भी हैं।

इस फिल्म के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के बारे में बात करते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा, "चूंकि मैं खुद एक गांव में रहा हूं, इसलिए मैं गंगाराम की जड़ों को समझ सकता था। लेकिन मुझे इस किरदार का खास तरह का व्यवहार समझने में वक्त लगा। इसमें मैंने एक दिलचस्प भूमिका निभाई, जिसके कई पहलू हैं और इससे मुझे एक एक्टर के तौर पर अपने अलग-अलग पहलुओं को आजमाने का मौका मिला। मैं हमेशा से एक ऐसी फिल्म का हिस्सा बनना चाहता था, जिसमें इंसानों और जानवरों का टकराव दिखाया गया हो और शेरदिल ने मुझे यह मौका दिया। इसके अलावा, शेरदिल के साथ मुझे अपने किरदार की भावनाओं और उसकी कमजोरियों को समझने में भी मदद मिली। नीरज कबी और सायनी गुप्ता जैसे टैलेंटेड एक्टर्स के साथ काम करना भी बड़ा क्रिएटिव अनुभव था। हम एक अच्छी फिल्म बनाना चाहते थे और हमने साथ में काम करते हुए बहुत एंजॉय किया, जहां हमें अपनी कला के बारे में चर्चा करने का मौका मिला। शेरदिल एक ऐसी फिल्म है, जो ज्यादा से ज्यादा लोगों, खासतौर से युवा दर्शकों के लिए देखने लायक है और हम इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि एंड पिक्चर्स के जरिए इस फिल्म को वो प्लेटफॉर्म मिला है।"

क्या गंगाराम झुंडाव के लोगों को इस मुसीबत से निकाल पाएंगे? क्या होगा गंगाराम का शिकार?