सांभर को जिला बनाने के लिये सकारात्मक राजनीतिक प्रयासों का अभाव

अन्तराष्ट्रीय पहचान होने के बावजूद सांभर को नहीं मिला जिले का दर्जा

शैलेश माथुर की रिपोर्ट  

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सांभरझील (जयपुर)। ऐतिहासिक व पौराणिक नगरी होने के साथ अन्तराष्ट्रीय स्तर पर वेटलैण्ड का दर्जा प्राप्त सांभर नगरी को जिले का दर्जा नहीं मिलने से अपने अस्तित्व को खोती जा रही है। वर्ष 1956 से सांभर जो कि उप जिले का दर्जा प्राप्त है को जिला घोषित करवाने के लिये मंाग अनवरत की जा रही है। वर्तमान हालात में जिले की खास दरकार है। प्रदेश सरकार की ओर से इसे पयर्टन क्षेत्र के रूप में भी पहचान दिलायी गयी है। सांभर उपखण्ड मुख्यालय पर तहसील व उपखण्ड अधिकारी कार्यालय सहित वे सभी तमाम सरकारी विभागों की मौजूदगी है, जो इसके वर्चस्व व जिले की मांग को पूरा करने के लिये पर्याप्त आधार रखते है। 

निवर्तमान सरकार की ओर से नवीन जिला कमेटी के अध्यक्ष रहे परमेश चन्द्र, जीएस संधु को विस्तृत विवरण के साथ अभ्यावेदन सौंपे जा चुके हैं। कई वर्षों से सरकार की ओर से इस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूर्व कमेटी के अध्यक्ष रहे परमेश चन्द्र व जीएस संधु की ओर से सांभर को जिला बनाये जाने के पक्ष में अपनी अभिशंषा सरकार को भेज चुके है, प्रदेश सरकार के मुखिया को इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस मामले में विधायक निर्मल कुमावत से बात करने पर कहा कि मैँने सात आठ बार सांभर को जिला बनाने के लिये विधानसभा में आवाज उठायी है। क्षेत्र की जनता को इसके लिये आगे आकर पुरजाेर तरीके से आवाज उठानी चाहिये, मैँ पूरा साथ दूंगा। 

कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे विद्याधर सिंह चौधरी का कहना है कि सरकार अभी कोई नवीन जिला गठित करने जा रही है इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं है। जिले की मांग के लिये क्षेत्र की जनता जो भी मदद चाहेगी इसके लिये हम लोग तैयार है। इसी मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत व पूर्व अध्यक्ष शेख शमीमुलहक का कहना है कि सांभर को जिले का हक इसलिये भी नहीं मिल रहा है कि यहां पर ठोस राजनीतिक प्रेशर का पूरी तरह से अभाव है। अभिभाषक संघ पहले भी सांभर को जिला बनाने का पक्षधर रहा है तथा आगे भी इसके लिये प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी जायेगी। 

व्यापार महासंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि जब तक राजनीतिक एकजुटता पूरी तरह से नहीं होगी तो सफलता मिलना बेहद ही कठिन है। हम सभी जिले की मांग को लेकर जो भी कदम उठाने होंगे उसके लिये अग्रसर रहेंगे। पूर्व चेयरमैन कन्हैयालाल सकरवाल का कहना है कि सत्ता व विपक्ष से जुड़े जितने भी नेता है वे सच्चे मन से अपनी मातृभूमि के लिये जिस इस दिशा में ठोस प्रयास कर लेंगे तो कोई हमें जिले का दर्जा मिलने से नहीं रोक सकता है। 

इस मामले में प्रमुख विचारक व समाजसेवी कैलाश शर्मा से बात करने पर बताया कि  राजस्थान सरकार के लिए न केवल आर्थिक और प्रशासनिक लिहाज से लाभकारी है, बल्कि इससे सामाजिक-सांस्कृतिक उद्भव भी होगा। एक मोटा अनुमान है, सांभर जिला मुख्यालय स्थापित होने के बाद राजस्थान सरकार को तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक के अतिरिक्त राजस्व की जहाँ प्राप्ति हो सकेगी, वहीं एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे। यही वजह है कि प्रदेश में जहाँ-जहाँ से जिला बनाने की जो मांग आ रही है, उसमें सांभर सबसे पहले रिजर्व करता है।