सांभर के दो प्रमुख उद्यानों के प्रति पालिका की दो साल से अनदेखी

शैलेश माथुर की रिपोर्ट 

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सांभरझील। सांभर में पुरानी तहसील के नजदीक सबसे प्राचीन गांधी बालवाड़ी और पांच बत्ती चौराहे के नजदीक नेहरू बालोद्यान विगत 2 साल से पालिका की अनदेखी से धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं।

गांधी बालवाड़ी के सौंदर्यीकरण की दिशा में  निवर्तमान भाजपा बोर्ड के दौरान पार्षद धर्मेंद्र ज़ोपट  एवं वर्ष 2005 के करीब तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र कुमार अग्रवाल के अथक प्रयासों से इनके चार चांद लगाए गए थे, रामनिवास गार्डन की तर्ज पर यहां के पार्कों को पूरी तरह से डवलप कर हरा-भरा किया गया था। लोगों को लुभाने के लिए फव्वारे गए थे।  लोगों  के बैठने के लिए सीमेंटेड बेंच भी लगाई गई थी। 

बच्चों के झूलने के लिए झूला भी लगाया गया था, कुल मिलाकर पार्क को विभिन्न पेड़ पौधों और फुलवारी लगाकर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनाया था। कड़ी मेहनत करके पार्क में खुले मैदान में हरि दोब भी लगाई गई थी। पेड़ पौधों को सींचने के लिए नियमित रूप से पानी का इंतजाम भी था। दक्ष बागवान की मदद से नियमित देखभाल व उक्त जनप्रतिनिधियों द्वारा नियमित मॉनीटरिंग भी की जाती थी। 

यहां तक की पूर्व सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर के प्रयासों व सांसद कोटे से व्यायाम शाला दोनों ही पार्कों में स्थापित की गई थी, जिनके रखरखाव एवं देखरेख की जिम्मेदारी पालिका के हवाले की गई थी। वर्तमान में दोनों ही पार्क नियमित देखभाल, साफ सफाई का अभाव आदि अनेक कारणों से अब दुर्दशा के कगार पर पूरी तरह से पहुंच गए हैं। पूर्व पार्षद विष्णु कुमार सिंघानिया भी लगातार इस मामले में पालिका को बराबर अवगत करवा रहे हैं लेकिन जिम्मेदार अपने कर्तव्यों से पूरी तरह विमुख बने हुए हैं। यहां के लोगों का कहना है कि यदि यही हालात रहे तो यह पार्क एक दिन पूरी तरह से सुख कर सपाट मैदान का रूप ले लेगा।