एआरटी फर्टिलिटी क्लिनिक्स पर पहली विज्ञापन फिल्म रिलीज

यह फिल्म एक ऐसी असहाय मां की यात्रा को दर्शाती है, जो सामान्य तरीके से अपने बच्चे के लिए गर्भ धारण करने की असफल कोशिशें करती रहती है।  उसकी ये कोशिशें तब तक चलती हैं, जब तक उसे यह पता नहीं लग जाता कि विज्ञान का जादू प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए उसके मातृत्व के सपने को साकार करने में मदद कर सकता है

www.daylife.page 

नई दिल्ली। एआरटी फर्टिलिटी क्लिनिक्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईवीएफ (IVF) उपचार उपलब्ध कराने वाली एक जानी-मानी चेन है। इसने हाल ही में अपना पहला टीवी फिल्म जारी की है। इसमें कंपनी के 3टी या तीन ट्रस्ट फैक्टर पर प्रकाश डाला गया है। ये ट्रस्ट फैक्टर एआरटी फर्टिलिटी को गर्भाधान में 70% की सफलता दर का मुकाम हासिल करने में मदद करते हैं। यह दर दुनिया में सबसे अधिक है। 

वास्तव में यह फिल्म एक महिला की असहाय स्थिति पर आशाओं की जीत की एक मार्मिक कहानी है।  इस कहानी को उस महिला ने संवेदनशील तरीके से अभिव्यक्त किया है। एक ऐसी महिला जो सामान्य तरीके से गर्भ धारण करने में विफल रहती है, लेकिन एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक में इलाज कराने के बाद वह गर्भधारण करने में सक्षम हो गई।

भारत में एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक  के सीईओ डॉ. सोमेश मित्तल कहते हैं, "हम अपनी अब तक की सबसे पहली विज्ञापन फिल्म प्रदर्शित करके बहुत रोमांचित महसूस कर रहे हैं। यह फिल्म हमारे 3 भरोसेमंद कारकों (ट्रस्ट फैक्टर्स) पर रोशनी डालती है। ये थ्री टी (तीन ट्रस्ट फैक्टर्स) हैं : उपचार (ट्रीटमेंट), प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) और पारदर्शिता (ट्रांसपरेंसी)। हमारे डॉक्टर्स, भ्रूण वैज्ञानिकों और नर्सिंग स्टाफ की  टीम दुनिया में सबसे अच्छी है। उनकी विशेषज्ञता और हमारा नवीन तकनीकों का इस्तेमाल मिलकर हमें इनफर्टिलिटी मैनेजमेंट और आईवीएफ उपचार के मामले में सबसे सफल समूह बनाते हैं। 

इलाज के दौरान हम जो कुछ नवीनतम और अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, इनमें ये शामिल हैं- (1) आरआई विटनेस सिस्टम यह आईवीएफ चक्र के प्रत्येक चरण की सुरक्षा के लिए प्रयोगशाला में सभी गतिविधियों का पता लगाने और निगरानी करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) का उपयोग करता है। आरएफआईडी रीडर्स को वर्कशॉप के साथ जोड़ दिया जाता है, ताकि सैंपल्स की निगरानी की जा सके। यह सुनिश्चित किया जा सके कि सैंपल्स में किसी तरह की न मिलावट हो और न प्रदूषित हों।

(2) XILTRIX अलार्मिंग सिस्टम यह प्रयोगशाला में निगरानी और अलार्म सिस्टम के लिए सेंसर उपलब्ध कराता है। यह प्रयोगशाला की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं के लिए जरूरी चीजों में से एक है।   (3) ZAND PCOC 3 एयर फिल्टर यह उद्योग में सबसे अच्छे पोर्टेबल एयर फिल्टर हैं।  आईवीएफ प्रयोगशालाओं के लिए यही सबसे बेहतर हैं। ये फिल्टर पूरा वातावरण मां के गर्भ जैसा स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए 0.001 माइक्रोन जैसे छोटे कणों को पकड़ लेते हैं।

एआरटी फर्टिलिटी क्लिनिक्स में मार्केटिंग एंड ग्रोथ के ग्रुप चीफ ऑफिसर श्री करण कुमार ने बताया, "हम अपनी कहानी सुनाने के दौरान एक भावनात्मक लेकिन यथार्थवादी तरीका अपनाना चाहते थे। यह तरीका एक ऐसी महिला की कहानी के जरिए तलाशा गया, जिसने खुद बांझपन का अनुभव किया था और इससे उबरने के लिए प्रमाण आधारित चिकित्सा का सहारा लिया था। हमने स्क्रिप्ट में सोच समझकर  उसके पति और सास की बातों को भी शामिल किया। हमारा मानना है कि वे दोनों किरदार कहानी में इस तरह से आते हैं कि जब भी महिला को जरूरत होती है, वे तुरंत और निहायत निजी सहायता मुहैया कराते हैं। हालांकि हमारे समाज में अक्सर ऐसा नहीं होता है। 

हम कहानी के जरिए यह भी बताना चाहते थे कि बांझपन का किसी खास लिंग (जेंडर) से कोई संबंध नहीं है। यह दोनों में से किसी में भी हो सकता है। पुरुष का बांझपन (इनफर्टिलिटी) भी एक ऐसे जोड़े के जीवन में समान रूप से जिम्मेदार कारक बन सकता है, जो बच्चे को जन्म देना चाह रहे हों या परिवार आगे बढ़ाना चाहते हों। हमें लगता है कि यह फिल्म जनसंचार का जो मौजूदा इकोसिस्टम है उसमें एक बहुत जरूरी दखल की तरह है। खासकर इसलिए कि इस संकट की गंभीरता के बावजूद बांझपन का विषय हमारे समाज के अधिकांश हिस्से में एक टैबू (वर्जित विषय) जैसा है।  हमें लगता है कि फिल्म इस विषय को मुख्य धारा की बहस के केंद्र में लाएगी। यह विषय सबके सामने खुले में आएगा।  प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अगुआ होने के नाते हमें लगता है कि इस विषय पर समाज में चर्चा करवाना भी हमारी जिम्मेदारी है और भारत में इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए हम सबसे बेहतर लोग हैं।"

इस नई फिल्म को रिलीज करना एआरटी का एकमात्र काम नहीं है।  पिछले कई महीनों से एआरटी फर्टिलिटी ने भारत में बांझपन की समस्या से निपटने की दिशा में जागरूकता के अनेक प्रयास किए हैं। भारत के हर 6 में से 1 जोड़ा बांझपन के संकट से जूझ रहा है। एआरटी फर्टिलिटी ने मीडिया हाउस एनडीटीवी के साथ अपनी अनूठी पहल "लेट्स टॉक इनफर्टिलिटी" नाम की फिल्म भी लांच की थी। इससे भी पहले एआरटी क्लिनिक चेन ने "ट्री ऑफ़ लाइफ" कार्यक्रम शुरू किया था। यह अनोखा कार्यक्रम था, जिसमें एआरटी ने छह राज्यों में जहां भी उसके क्लिनिक हैं, वहां बच्चे के जन्म के मौके पर एक पौधा रोपा है। साल का आरंभ  अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस " ANNO 2023" से किया था। इस कांफ्रेंस में प्रजनन तकनीकों और प्रजनन चिकित्सा में नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित किया गया था।