साधु संतों के सानिध्य में हुई 121 दिवसीय रामचरितमानस की पूर्णाहुति

साधु-संतों दी गई विदाई

शैलेश माथुर की रिपोर्ट 

www.daylife.page 

सांभरझील (जयपुर)। यहां चतुर्मास एवं सांभर नगर के सर्वांगीण विकास के लिए विगत 10 जुलाई एकादशी से प्रारंभ हुई 121 रामचरितमानस अखंड पाठ की पूर्णाहुति बाहर से आए अनेक साधु-संतों के सानिध्य में संपन्न हुई। श्री पंचमुखी बालाजी आश्रम (मंदिर) के महात्यागी विपिनदास जी महाराज ने बताया कि सांभर को जिला बनाने के लिए वर्ष 1952 से लगातार चल रही मुहिम में विगत 7 दशकों से क्षेत्र के लोगों ने जो इसमें अपना सहयोग एवं योगदान दिया है, उसी अनुरूप क्षेत्रवासियों की यह मंगल कामना पूर्ण हो तथा सरकार इसी बजट सत्र में सांभर को जिला घोषित करें इसके लिए भी यज्ञ में साधु संतों की ओर से आहुतियां दी गई है। हवन में 62 जोड़ों ने आहुतियां दी। 

इस अवसर पर श्री पंचमुखी बालाजी की प्रतिमा का भव्य श्रृंगार किया गया जिसे देखकर लोग भक्ति भावना से ओतप्रोत हो गए। राम सीता की प्रतिमाओं  को भव्य रूप प्रदान किया गया। मंदिर को फूल मालाओं व रोशनी से सरोबार किया गया। श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर में छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। शाम को महाप्रसादी में सर्वप्रथम साधु-संतों ने प्रसादी ग्रहण तथा बाहर से पधारे सभी साधु संतों को विदाई दी गई। साधु संतो की इसी कड़ी में रविवार को सवाई माधोपुर महामंडलेश्वर महंत अंगददास महाराज, अयोध्याधाम के मदन मोहनदास महाराज, हीरादास महाराज, नर्मदा खंड के प्रवीणदास महाराज, अलवर के  जगदीशदास महाराज व भोपाल के अमरदास महाराज ने आने वाली सभी श्रद्धालु,भक्तों को अपना आशीर्वचन व आशीर्वाद दिया। 

इस मौके पर श्री पंचमुखी बालाजी आश्रम से जुड़े अनेक भक्तों, क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी में पंगत प्रसादी ग्रहण की। विपिन दास महाराज महात्यागी ने बताया कि 121 दिवसीय रामचरितमानस अखंड पाठ के पश्चात श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर अब पूर्णाहुति के साथ ही आश्रम के नाम से पहचान दी गई है। भारी तादाद में साधु संतों का यहां पर आना और सालिगराम तुलसी विवाह महोत्सव में अपना आध्यात्मिक योगदान देना सांभर नगर के लिए सौभाग्य  की बात है। इस मौके पर एनसीसी की छात्राओं सहित अनेक सेवादारों ने भी अपनी सेवाएं दी।