भारत की गाबा जीत का अर्थ: युवाओं की शक्ति

गौतम अदाणी

चेयरमैन, अदाणी ग्रुप

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25 जून, 1983 का दिन था, जब भारत ने क्रिकेट विश्व कप को हासिल किया था। मुझे साफ तौर पर याद है कि जैसे ही हमने कमेंट्री सुनी, मेरा डर खुशी में बदल गया था। हमारी क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीद नहीं थी, सेमीफ़ाइनल में तो निश्चित रूप से नहीं थी, और विश्व कप का फाइनल जीतना जिसमें वेस्ट इंडीज के दिग्गज क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, और गॉर्डन ग्रीनिज पूरे दमखम में खेल रहे थे, केवल सिरफिरे ही भारत को मौका मिलने की उम्मीद कर सकते थे। मेरे जैसे एक आशावादी के लिए जो पिछले ही दिन 21 वर्ष का हुआ था, अपना 21वां वर्ष शुरू करने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता था ... मेरा देश भारत विश्व क्रिकेट चैंपियन बन चुका था!

इसी तरह, गाबा में 19 जनवरी, 2021 को भारतीय क्रिकेट टीम की जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे महान दिनों में दर्ज की जायेगी। दो राष्ट्रों ये टीमें दुनिया की दो सर्वश्रेष्ठ टीमें थीं, जो एक गहरा संबंध साझा करती हैं, ये दोनों देश आईपीएल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी देते हैं, और ये दोनों टीमें जीत हासिल करने की अपनी प्रबल प्रेरणा और प्रवृत्ति (एट्टिट्यूड) के लिए जानी जाती हैं। यह सीरीज़ बहुत ही गंभीर थी, क्योंकि तीसरे टेस्ट मैच के अंत में 1:1 से दोनों टीम टाई कर रही थीं, और यहां तक कि चौथा टेस्ट मैच भी 5वें दिन के अंतिम सत्र तक ओपन था। इससे अधिक नाटकीय स्थिति कोई और नहीं हो सकती थी!

मेरा उद्देश्य इस बात पर चर्चा करना नहीं है कि किस टीम ने जीत हासिल की है, बल्कि यहां मेरा उद्देश्य युवाशक्ति पर चर्चा करना अधिक है, जो भारत सहित दुनिया में जो कुछ भी हमारे आसपास हो रहा है, उसे अधिक परिभाषित कर रहा है। ऋषभ पंत, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, शुभमन गिल, शार्दुल ठाकुर और वाशिंगटन सुंदर इस बात के साक्षी थे कि नया भारत क्या हो सकता है और क्या होगा। एट्टिट्यूड मायने रखता है। भरोसा मायने रखता है। सबसे अधिक नजरिया और जोश मायने रखता है। यह क्रिकेट से अधिक महत्वपूर्ण था। इन युवाओं ने हमारे राष्ट्र के नजरिये, भरोसे और भावना को प्रतिबिंबित किया।

इस जीत के बाद, मैं इन युवाओं की व्यक्तिगत यात्राओं को देखने के लिए काफी प्रेरित हुआ। हर एक कहानी बलिदान, संघर्ष और गहरे समर्पण की कहानी है। उनमें से किसी के लिए यह जीत, सिर्फ भारतीय क्रिकेट की प्रतिभा की गहराई और संख्याबल के कारण ही आसान नहीं थी, लेकिन इसी वजह से उन्होंने दबाव को संभालने में लचीलेपन का प्रदर्शन किया। भारतीय टेस्ट टीम में स्थायी स्थान प्राप्त करना तेजी से कठिन होता जा रहा है और यह इन युवाओं के खेलने के तरीके से स्पष्ट था। 

वे भारत के नये नजरिये के प्रतिबिंब हैं जो जबरदस्त लचीलेपन के साथ युवाओं का एक माहौल बना रहा है, और वे न केवल क्रिकेट में - बल्कि सभी क्षेत्रों में, मौके को आजमाते हैं। ये युवा उस मौलिक सिद्धांत का प्रतिबिंब  हैं जो बताता है कि केवल वे ही हैं जो नतीजों को लेकर निडर हैं और ऐसे जोखिम उठाते हैं जो बड़े परिणाम देती हैं।

गाबा में हासिल की गई हमारी जीत, नजरिये में व्यापक बदलाव का प्रमाण है। जो प्रतिभा जोखिम उठाती है वह तेज प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्र में भी शीर्ष पर पहुंच जाएगी। आखिरकार, 1.3 बिलियन की आबादी के बीच उभरना और चमकना कोई आसान काम नहीं है। भारतीय स्टार्ट-अप की दुनिया में अब 27,000 से अधिक स्टार्टअप कंपनियां हैं। यह हमें दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बनाता है। इसमें और तेजी आयेगी, और इसको लेकर मुझे कोई संदेह नहीं है। 

हम आने वाले स्टार्ट-अप बूम की कगार पर बैठे हैं, जिससे मुझे उम्मीद है कि आने वाले दशक में दर्जनों ‘यूनिकॉर्न’ कंपनियों का निर्माण होगा और व्यापक तौर पर कई इनोवेशन और फंड फ्लो सामने आयेंगे जो अन्य स्पिन-ऑफ लाभों को जन्म देंगे। यह एक वास्तविक शक्ति है जो भारत की युवावस्था हमारे राष्ट्र को दे रही है। यह जनसांख्यिकीय लाभ के साथ ही बढ़ते मध्य वर्ग की भी वास्तविक अभिव्यक्ति है।

खेलकूद से मैंने बहुत कुछ सीखा है। एक कॉरपोरेट दृष्टिकोण से, गाबा की जीत ने मेरे विश्वास को और अधिक मजबूत कर दिया कि किस तरह से हमें आज संस्थाओं का निर्माण करना चाहिए, ताकि आप व्यापक लाभ हासिल कर सकें और वह तरीका है युवाओं को मौका देना। अनुभव से अधिक नजरिये को महत्व दें। परिमार्जन और चमक से अधिक जोश और शौक को अवसर दें। योजना बनाने वाली समझ से अधिक महत्व कार्यान्वयन की अनगढ़ शक्ति को दें।

सुपर सीरीज के लिए दोनों टीमों को बधाई – इस सीरीज़ ने दो महान देशों के 22 खिलाड़ियों के सर्वश्रेष्ठ योगदान को प्रस्तुत किया। इसने युवाशक्ति के प्रति मेरे भरोसे को और मजबूत बनाया।